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योजना के बारे में

शाला पूर्व शिक्षा अथवा पूर्व प्राथमिक शिक्षा पूरे जीवन के विकास एवं शिक्षण के लिये एक अपरिहार्य आधार है जिसका बच्चों के शैक्षणिक एवं सामाजिक विकास पर स्थायी प्रभाव पड़ता है। न्यूरोसांइस के साक्ष्य बताते हैं कि बच्चे के मस्तिष्क का 85 प्रतिशत विकास 06 वर्ष की आयु के पहले हो जाता है। अपने प्रारंभिक वर्षाें में विभिन्न स्तरों पर उपेक्षा या अभावों का सामना करने वाले बच्चों के मस्तिष्क के स्कैन के विश्लेषण से मस्तिष्क के महत्वपूर्ण क्षेत्रों के विकास में कई कमियों का पता चलता है। अतः 03 से 06 वर्ष के बच्चों के भविष्य की सुदृढ़ रूपरेखा के निर्धारण करने तथा गुणवत्तापूर्ण एवं परिणाममूलक शाला पूर्व शिक्षा की उपलब्धता सुनिश्चित करने हेतु आवश्यक है कि इस आयु वर्ग के बच्चों को शाला पूर्व शिक्षा प्रदाय करने वाले सभी स्टेकहोल्डर्स द्वारा संचालित संस्थाओं का नियमन किया जाये।
        प्रदेश में 03 से 06 वर्ष तक की आयु के बच्चों को शाला पूर्व शिक्षा प्रदान करने के लिये शासकीय क्षेत्र में आंगनवाडी केन्द्र एवं अशासकीय क्षेत्र में अनेक निजी संस्थाएं यथा नर्सरी स्कूल, प्ले स्कूल, किंडर गार्टन इत्यादि संचालित है। आंगनवाडी केन्द्रों के माध्यम से 03 से 06 वर्ष तक के बच्चों को भारत सरकार से प्राप्त दिशा-निर्देशानुसार शाला पूर्व शिक्षा उपलब्ध कराई जाती है, परन्तु अशासकीय क्षेत्र में संचालित निजी संस्थाओं हेतु 06 वर्ष तक की आयु के बच्चों को शाला पूर्व शिक्षा/पूर्व प्राथमिक शिक्षा उपलब्ध कराने के लिये सुस्पष्ट दिशा-निर्देश एवं गुणवत्ता मानकों का निर्धारण नहीं है। पूर्व प्राथमिक शिक्षा के क्षेत्र में बिना किसी नियमन के संचालित अधिकांश निजी संस्थाओं द्वारा प्रदाय की जा रही शाला पूर्व शिक्षा की गुणवत्ता में विविधता है, अतः यह आवश्यक है कि पूर्व प्राथमिक शिक्षा प्रदाय कर रहे निजी क्षेत्र की शालाओं में बाल अधिकारों की सुरक्षा के लिये पंजीयन एवं निगरानी प्रक्रिया सुनिश्चित की जाये। राष्ट्रीय ईसीसीई पॉलिसी 2013, राष्ट्रीय बाल अधिकार संरक्षण आयोग के निर्देश, मध्यप्रदेश कार्यावंटन नियमों एवं ईज़ ऑफ डूइंग बिजनेस संबंधी निर्देशों को ध्यान में रखते हुए प्रायवेट पूर्व प्राथमिक शालाओं के लिये महिला एवं बाल विकास विभाग के विभागीय पोर्टल पर ऑनलाइन पंजीयन सुविधा प्रारंभ की गयी है।