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अधीनस्थ कार्यालय

जवाहर बाल भवन -:

जवाहर बाल भवन, महिला एवं बाल विकास विभाग के अंतर्गत संचालित शासकीय संस्थान है। जिसका उद्देश्य 5 से 16 वर्ष की आयु के बच्चों को उनकी आयु, अभिवृत्तियों तथा क्षमताओं के अनुरूप परस्पर मेलजोल बढ़ाने, प्रयोग करने, सृजन तथा प्रस्तुतिकरण के लिये विभिन्न गतिविधियां, अवसर व समान मंच प्रदानकरना है।

यह बच्चों के लिए तनाव रहित, बाधामुक्त व नवीकरण की संभावनाओं से युक्त वातावरण उपलब्ध कराता है।

बाल भवन का प्रशिक्षण सामान्य रूप से पाठ्यक्रम रहित तथा परीक्षा मुक्तरखा गया है। ताकि बच्चे स्वतंत्र रूप से अपनी अभिरूचियों का विकास कर सकें, तथापि बच्चों को प्रदर्शनकारी व रूपांकर कलाओं का ऐसा प्रशिक्षण दिया जानाहै, जिससे बच्चा उन कलाओं की बुनियादी जानकारी प्राप्त कर ले और उन कलाओंकी तकनीकी शब्दावली से अवगत हो सके। अभिभावक वर्ष में कभी भी बच्चे कोप्रवेश दिलवा सकते हैं और बाल भवन में विभिन्न गतिविधियों के लिये जो समय निर्धारित है, उस समयावधि में बच्चा प्रशिक्षक से चर्चा कर किसी भी सुविधाजनक कालखंड में आ सकता है।

जवाहर बाल भवन में एयरोमाडलिंग, संगीत, नृत्य, गृह विज्ञान, सिलाई-कढ़ाई, चित्रकला, नाटक, हस्तकला, मूर्तिकला, विज्ञान, खेल कूद, कम्प्यूटर, आधुनिक संगीत एवं आधुनिक कला इत्यादि का प्रशिक्षण दिया जाताहै। वर्ष 2013-14 से उक्त गतिविधियों के साथ-साथ, आधुनिक अभिनय कला, बागवानी, पर्यावरण जल संसाधन, संतुलित आहार का महत्व मोरल एजूकेशन वविभिन्न खेलों के प्रशिक्षण की योजना है।

बाल संरक्षण गृह -:

महिला एवं बाल विकास विभाग द्वारा कुष्ठ रोगियों के स्वस्थ बच्चों केलिये 3 बाल संरक्षण गृह उज्जैन, सिवनी, सीधी में संचालित है। इन संस्थाओं का उद्देश्य कुष्ठ रोगियों के स्वस्थ बच्चों को उनके माता-पिता से अलग रखकर उनका पालन-पोषण करना है और उन्हें सामाजिक और शैक्षणिक संरक्षण प्रदान करना है। प्रत्येक गृह में 30 बच्चों के रहने की व्यवस्था है। वर्तमान में इन गृहो में 59 बच्चे निवासरत है।

राजकीय बाल संरक्षण आश्रम, इन्दौर -:

अनाथ एवं निराश्रित बच्चों के लिये बाल संरक्षण आश्रम (अनाथालय) इन्दौर में संचालित है। इस आश्रम में अनाथ एवं निराश्रित बच्चों की आवास, भोजन और शिक्षण - प्रशिक्षण की व्यवस्था की जाती है। इस आश्रम में रहने वाले अनाथ बच्चों की क्षमता 50 की है। 13 वर्ष तक की आयु के निराश्रित एवं अनाथ बच्चों को इस संस्था में रखा जाता है।

बालवाड़ी सह संस्कार केन्द्र -:

गरीब और मध्यम वर्ग की महिलाओं के बच्चों को अनौपचारिक शिक्षा देने और उनके सर्वांगीण विकास के लिए बालवाड़ी सह संस्कार केन्द्र संचालित है। इन संस्कार केन्द्रों में 3 से 6 वर्ष तक के बच्चे लाभांवित होते है। एक बालवाड़ी में 25 से 30 बच्चे लाभांवित हो सकते है। मध्यप्रदेश में 6 बालवाड़ी सह संस्कार केन्द्र संचालित हैं जो मण्डला, बालाघाट, बुरहानपुर,ग्वालियर, मनगवा (रीवा) एवं बैरसिया (भोपाल) में है।

शासकीय झूलाघर -:

निम्न एवं मध्यम आय वर्ग की कामकाजी महिलाओं के छह माह से छह वर्ष तक केबच्चों की देखभाल के लिए झूलाघर संचालित है। इन झूलाघरों में बच्चों को छहसे आठ घण्टों के लिए रखा जाता है। एक झूलाघर के लिए एक बाल सेविका और एकआया रहती है। झूलाघर में बच्चों को रखने के साथ-साथउन्हें खेल-खेल केमाध्यम से अनौपचारिक शिक्षा भी दी जाती है। मध्यप्रदेश में कुल आठ शासकीयझूलाघर संचालित है जो ग्वालियर, सागर, उज्जैन, सतना, होशंगाबाद, भोपाल, खण्डवा और जबलपुर में हैं। प्रत्येक झूलाघर में 25 बच्चों की क्षमतानिर्धारित है। वर्तमान में कुल 155 बच्चे लाभान्वित हो रहे हैं।

राजकीय अनुरक्षण गृह, ग्वालियर -:

अनाथालयों में पालन-पोषण की गई अनाथ तथा कुष्ठ रोगियों की 13 वर्ष सेअधिक आयु की स्वस्थ बालिकाओं को संरक्षण देकर उनके पालन पोषण, शिक्षा, प्रशिक्षण तथा पुनर्वास की व्यवस्था के लिये राजकीय अनुरक्षण गृह का संचालनकिया जाता है। मध्यप्रदेश में 13 वर्ष से अधिक आयु की किशोर बालिकाओं केलिए यह एक मात्र अनुरक्षण गृह है। इस संस्था में रहने वाले अंतःवासियों कीक्षमता 50 बालिकाओं की है। वर्तमान में कुल 21महिलाएं निवासरत हैं।

नारी निकेतन- विधवा, परित्यक्ता, निराश्रित, कुंवारी माताओं एवं समाज से प्रताडि़त महिलाओं को आश्रय देने के उद्देश्य से नारी निकेतन स्थापित है।इन नारी निकेतनों में महिलाओं और उनके 7 वर्ष तक के बच्चों को रखा जाता हैऔर महिलाओं को व्यवसायिक प्रशिक्षण देकर उनके पुनर्वास की व्यवस्था की जाती है। इस तरह की महिलाओं के द्वारा आश्रय विहीनता संबंधी प्रमाण पत्र के आधार पर प्रवेश दिया जाता है। संस्थाओं के संचालन एवं देख-रेख के लिए कलेक्टर की अध्यक्षता में परामर्शदात्री समिति गठित होती है। प्रत्येक नारी निकेतन की क्षमता 50 महिलाओं की है। मध्यप्रदेश में यह नारी निकेतन सतना, उज्जैन, भोपाल एवं ग्वालियर में संचालित है। वर्तमान में कुल 35 महिलाएं निवासरत हैं।

अल्पकालीन आवास गृह -:

विभिन्न मामलों में न्यायालय द्वारा भेजी गई महिलाओं को अल्पकालीन आवासगृहों में रखा जाता है और उनके आवास, भोजन, शिक्षा एवं प्रशिक्षण की व्यवस्था की जाती है जिससे वे महिलाएं आत्मनिर्भर बन सकें। प्रत्येक केन्द्र की क्षमता 50 महिलाओं की है। मध्यप्रदेश में यह गृह रीवा तथा जबलपुर में संचालित है। वर्तमान में 05 महिलाएं निवासरत हैं।

महिला उद्धार गृह, इन्दौर -:

इम्मोरल टेफिक (प्रिवेन्शन) एक्ट के अंतर्गत न्यायालय द्वारा भेजी गईमहिलाओं और उनके बच्चों को इस संस्था में रखा जाता है और उनके नैतिक सुधारके साथ-साथ आवास, शिक्षा एवं प्रशिक्षण की व्यवस्था की जाती है। महिला उद्धार गृह का उद्देश्य वैश्यावृत्ति में संलग्न महिलाओं को अन्य स्वरोजगारमूलक धन्धों में लगाकर समाज में पुर्नस्थापित करना है। उद्धार गृह में 50 महिलाओं के रहने की क्षमता है। वर्तमान में रहवासियों की संख्या निरंक है।

शासकीय सिलाई केन्द्र -:

गरीब, बेसहारा, निम्न मध्यम वर्गीय परिवार की महिलाओं को सिलाई-कढ़ाई काप्रशिक्षण देकर आत्मनिर्भर बनाने के लिए 19 शासकीय सिलाई-कढ़ाई केन्द्रसंचालित है। ये केन्द्र बैतूल, धार, खरगौन, श्योपुर, रतलाम, भोपाल, सीहोर, मण्डला, होशंगाबाद, छिन्दवाड़ा, दतिया, शहडोल, सीधी, रीवा (दो), पन्ना, छतरपुर, टीकमगढ़ एवं सतना में संचालित है। इन केन्द्रों में 5वीं उत्तीर्णमहिला प्रवेश ले सकती है। एक केन्द्र में एक बार परीक्षा लेकर प्रमाण पत्रजिला कार्यक्रम अधिकारी/जिला महिला बाल विकास अधिकारी द्वारा दिये जातेहैं। वर्तमान में कुल 570 महिलाएं लाभांवित हो रही हैं।

महिला वसति गृह -:

अपने गृह नगर से बाहर व्यवसाय या नौकरी करने वाली महिलाओं को आवासीय सुविधा उपलब्ध कराने के उद्देश्य से महिला वसति गृह स्थापित किये गये हैं।वसति गृह में कामकाजी महिलाओं के अलावा स्थान रिक्त रहने की स्थिति मेंकालेज या अन्य व्यवसायिक पाठ्यक्रम में अध्ययनरत छात्राओं को भी स्थान दिया जा सकता है। मध्यप्रदेश में महिला वसति गृह इन्दौर एवं जबलपुर में संचालितहै। वर्तमान में कुल 38 महिलाएं निवासरत हैं।